Roaring Lion से Epic Fury तक, Tehran Tension पर US का बड़ा बयान

राघवेन्द्र मिश्रा
राघवेन्द्र मिश्रा

मध्य-पूर्व इस वक्त शतरंज की बिसात नहीं, ज्वालामुखी का मुंह लग रहा है। इजरायल के ‘Operation Roaring Lion’ और अमेरिका के ‘Operation Epic Fury’ के बाद ईरान के इस्फ़हान, शिराज और कंगवार धमाकों से गूंज उठे।

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो का बयान इस आग में घी की धार जैसा था। उनका कहना है कि तेहरान पर हमला अमेरिकी सैनिकों की सुरक्षा के लिहाज से “जरूरी” था। कूटनीति की भाषा में इसे ‘defensive strike’ कहा जा सकता है, लेकिन ज़मीन पर इसका मतलब है आसमान से बरसती आग।

US का तर्क: सुरक्षा या रणनीतिक संदेश?

अमेरिका का दावा है कि ईरान के IRGC कमांड सेंटर और ड्रोन लॉन्च साइट्स पर सटीक हमले किए गए। CENTCOM के अनुसार, इन स्ट्राइक्स से ईरानी सैन्य ढांचे को “significant damage” पहुंचा है।

लेकिन सवाल वही पुराना है। क्या हर नई बमबारी अगले युद्ध को रोकती है, या बस अगली सुर्खी की तैयारी करती है?

Israel का विस्तार: लेबनान में जमीनी कार्रवाई

इजरायली सेना ने दक्षिणी लेबनान में ग्राउंड ऑपरेशन की आधिकारिक घोषणा कर दी है। Hezbollah के ड्रोन हमलों ने इजरायली एयरबेस और रडार सिस्टम को निशाना बनाया। जवाब में एयरस्ट्राइक और जमीनी कार्रवाई दोनों तेज हो चुकी हैं।

बेरूत में हालिया हमले ने लेबनान की रात को सायरनों की आवाज़ से भर दिया।

China की चिंता: Hormuz का हिसाब

चीन ने ईरान से होर्मुज जलडमरूमध्य में सैन्य गतिविधि रोकने की अपील की है। दुनिया का सबसे बड़ा तेल खरीदार इस मार्ग में किसी भी रुकावट को वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए तूफान मान रहा है।

तेल की टंकी पर अगर चिंगारी गिरे, तो सिर्फ एक देश नहीं जलता, पूरी मार्केट धुआं छोड़ती है।

Nuclear Narrative: “जन्मसिद्ध अधिकार” का दावा

अमेरिकी विशेष दूत ने साफ कहा कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना अमेरिका का “birthright” है। यह शब्दावली खुद में भू-राजनीतिक कविता है, जहां हर लाइन में शक्ति संतुलन की स्याही लगी है।

West Bank से Tehran तक डर का फैलाव

वेस्ट बैंक में जिंदा मिसाइल वारहेड मिलने के बाद घर खाली कराए गए। यह सिर्फ सैन्य रणनीति नहीं, आम नागरिकों की रोजमर्रा की जिंदगी में घुसती बेचैनी है।

युद्ध के हर अपडेट के पीछे एक अनकही लाइन होती है। “Collateral damage.” यह शब्द जितना छोटा है, उसका असर उतना ही लंबा। यह टकराव सिर्फ मिसाइलों का नहीं, narratives का भी है। एक तरफ “security”, दूसरी तरफ “sovereignty”. बीच में पूरी दुनिया सांस रोके खड़ी है।

“War नहीं, Law की बात! खामेनेई मामले पर खरगे का कूटनीतिक वार”

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